Wednesday, November 30, 2022
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MP Breaking: कैथा के पूर्व भ्रष्टाचारी सचिव अच्छेलाल पटेल को सेदहा की कमान देने की तैयारी // कराधान करारोपण जैसे घोटाले में महती भूमिका निभाने वाले गंगेव जनपद के सीईओ प्रमोद ओझा का कारनामा // प्रस्ताव बनाकर जिला पंचायत सीईओ को भेजा

सेदहा ग्राम पंचायत के सरपंच सहित ग्रामीणों ने भ्रष्टाचारी सचिव को सेदहा भेजने पर किया विरोध

दिनांक 17 सितंबर 2022 रीवा मध्य प्रदेश। अपने पूर्व के कार्यकाल में पंचायती भ्रष्टाचार में अब्बल दर्जे पर रहे और गंगेव जनपद की कैथा पंचायत के पूर्व निलंबित सचिव अच्छेलाल पटेल को अब सेदहा पंचायत की जिम्मेदारी देने का सिलसिला चल रहा है। कराधान और करारोपण 14वें वित्त आयोग के भ्रष्टाचार के मास्टरमाइंड रहे गंगेव जनपद में जनक रहे वर्तमान गंगेव जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा के द्वारा जिला पंचायत सीईओ स्वप्निल वानखेडे को तत्सम्बन्ध में प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। लेकिन ग्राम पंचायत सेदहा के सरपंच पूनम सिंह और अन्य गणमान्य ग्रामीण भूतपूर्व सरपंच राजमणि सिंह, जयप्रकाश त्रिपाठी, दिलराज सिंह एवं अधिवक्ता अरुण सिंह आदि ने भ्रष्टाचारी सचिव के सेदहा पंचायत में आने का विरोध किया है।

409 और 420 जैसे गंभीर धाराओं में दर्ज हैं भ्रष्टाचारी सचिव अच्छेलाल के ऊपर प्रकरण

गौरतलब है कि वर्ष 2015 से लेकर 2021 तक पूरे 7 वर्ष के कार्यकाल मे पिछली पंचायती क्रियाकलापों के दौरान ग्राम पंचायत कैथा जनपद पंचायत गंगेव के बर्खास्त सरपंच संत कुमार पटेल और तत्कालीन निलंबित सचिव अच्छेलाल पटेल के ऊपर लगभग 18 लाख रुपये की रिकवरी और साथ में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 और 34 के तहत एफआईआर संबंधित गढ़ थाने में दर्ज है जिसका मुकदमा अभी भी चल रहा है। मामले में हाईकोर्ट जबलपुर से रिलीफ लेने का प्रयास किया गया लेकिन सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया गया की रिकवरी के कुछ पैसे जमा करने के बाद इन्हें जमानत मिली थी जबकि अभी तक मामला प्रक्रिया में है और फैसला नहीं हुआ है ऐसे में निलंबित सचिव को बहाल किया जाना और किसी ग्राम पंचायत का प्रभार दिया जाना मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गंगेव के भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले चरित्र को उजागर करता है।

ओझा के कार्यकाल में करारोपण की पात्रता और पंचायतों में कर लगाने की प्रक्रिया में कूट रचित दस्तावेज तैयार कर हासिल की गई थी पात्रता

बता दें कि इसके पहले भी कराधान करारोपण और 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार के दौरान तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गंगेव के पद पर प्रमोद ओझा आसीन थे। उसी समय इनके कार्यकाल में व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार हुआ। बताया गया कि जब करारोपण का कार्य किया जा रहा था उस समय फर्जी तरीके से कूट रचित दस्तावेज तैयार कर ग्राम पंचायतों के द्वारा करारोपण होना बताया गया जिसके आधार पर 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट की राशि सीधे जनपद पंचायत गंगेव की 38 ग्राम पंचायतों के एकल खाते में अंतरित की गई थी।

पीएम आवास घोटाले को लेकर प्रिंसिपल सेक्रेट्री उमाकांत उमराव ने सीईओ प्रमोद ओझा को किया था निलंबित

इसके पूर्व गंगेव जनपद की कई ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास को लेकर व्यापक स्तर का घोटाला सामने आया था। जिसके आधार पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी उमाकांत उमराव के द्वारा कठोर कदम उठाते हुए वर्तमान गंगेव जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा को दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया था। इसके बाद अपने राजनीतिक रसूख का प्रयोग करते हुए प्रमोद ओझा वापस गंगेव जनपद में पदस्थ हुए लेकिन जबसे इनकी पदस्थापना हुई है पहले की भांति यह निरंतर संपूर्ण गंगेव जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। अभी भी कई ग्राम पंचायतों में पीएम आवास घोटाले की जांच चल रही है लेकिन इनके द्वारा फाइल को दबाने का ही कार्य किया जा रहा है। हाल ही में चौरी ग्राम पंचायत में फर्जी एफटीओ जारी कर इनके द्वारा नाला सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार करवाया गया।

जनपद पंचायत गंगेव में भ्रष्टाचार की नित नई इबारत लिख रहे प्रमोद ओझा

पिछले कुछ दशक से रीवा जिले की गंगेव जनपद में भ्रष्टाचार के मामले दिन दूनी रात चौगुनी तरीके से बढ़ रहे हैं उसका कारण मात्र गंगेव जनपद में वर्तमान में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा है। आए दिन इनके विषय में चाहे वह पीएम आवास हो अथवा अन्य भ्रष्टाचार सभी में अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। इनके कमीशन का खेल इस कदर चल रहा है जिससे लोग बेहद परेशान हैं। सीईओ प्रमोद ओझा के विषय में दर्जनों शिकायतें लंबित हैं जिन पर जांचें चल रही हैं। लेकिन भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले सीईओ ओझा अंगद की तरह एक ही जगह पर गंगेव जनपद में पांव जमाए बैठे हुए हैं। और इसके लिए कोई सबसे अधिक जिम्मेदार है तो यहां के स्थानीय नेता विधायक जो कमीशन के चक्कर में भ्रष्टाचारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी को गंगेव जनपद में बैठा कर रखे हुए हैं।

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