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आंबेडकर अस्पताल की ‘सांसें’ अटकीं, 2005 की मशीनों से मरीजों का इलाज! कबाड़ के भरोसे राजधानी रायपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था

 

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रायपुर। जिन डॉक्टरों ने कोरोना काल में अपनी जान हथेली पर रखकर मरीजों की जान बचाई, उनकी सेवाएं अब सवालों के घेरे में हैं। इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य विभाग की मशीनरी का ध्वस्त होना है। अस्पतालों में न तो पर्याप्त चिकित्सक हैं और न ही जांच की मशीनें ठीक हालत में हैं। यह स्थिति प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी आंबेडकर अस्पताल की है। इसकी दीवारें तो मजबूत हैं, लेकिन इसके भीतर का तकनीकी ढांचा पूरी तरह खोखला हो चुका है। डॉक्टर इलाज करना चाहते हैं, लेकिन जिन हथियारों (मशीनों) से उन्हें बीमारी से लड़ना है, वे ही जंग खा रहे हैं।

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