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जंगल सफारी में पिछले 6 माह में सैकड़ों वन्यप्राणियों की मौत !, जिम्मेदारी किसकी?

डॉक्टर राकेश वर्मा को इसकी स्वीकृति नहीं मिली थी, फिर भी सीडब्ल्यूएलडब्लयू से स्वीकृति लेकर अवकाश पर चले गए,जिस पर उन्हें नोटिस दिया गया है।

 

रायपुर। अटल नगर में स्थित एशिया के सबसे बड़े जंगल सफारी में दुर्लभ वन्य प्राणी जानलेवा संक्रमण की चपेट में हैं। बीते एक हफ्ते में 24 चौसिंगा, तीन काले हिरण और एक नीलगाय की मौत हो गई। जबकि चार चौसिंगा, एक नीलगाय और एक काले हिरण की हालत चिंताजनक बनी हुई है ।

पिछले 6 माह में सैकड़ों वन्यप्राणियों की मौत :

सूत्र बताते हैं पिछले 6 माह में बहुत ज्यादा वन्यप्राणियों की मौत हुई है जिसमें लगभग 50-60 नीलगाय,40-50 चौसिंगा और 20-30 काले हिरणों सहित अन्य वन्यप्राणियों की भी मौत हुई है। स्पष्ट है की डॉक्टर और अधिकारियों की लापरवाही से मौत हुई है?
सूत्र तो ये भी बताते हैं कि कुछ माह पहले एक तेंदुआ की भी मौत हुई थी जिसकी खबर दबा दी गयी थी।

जानकारी देने से बच रहे अधिकारी :

जंगल सफारी प्रबंधन के अधिकारी इसके बाद भी पूरे मामले में जानकारी देने से बच रहे है। सफारी के डायरेक्टर से लेकर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया से दूरी बना ली है। दूसरे अधिकारी से बात करने का हवाला देकर अधिकारी अपनी गर्दन बचा रहे हैं। और तो और पर्यटकों की जान भी खतरे में डाली जा रही है। ऐसे में वो बीमार हुए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

जंगल सफारी के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉक्टर राकेश वर्मा छुट्टी पर हैं। सूत्र बतातें हैं कि डॉक्टर राकेश वर्मा को इसकी स्वीकृति नहीं मिली थी, फिर भी सीडब्ल्यूएलडब्लयू से स्वीकृति लेकर अवकाश पर चले गए। अधिकारियों ने पीसीसीएफ से इसकी शिकायत की है।

संक्रमण के बाद भी पर्यटकों को भ्रमण करा रहे: 

हिरन, चौसिंगा, नील गाय संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। ये जानकारी सफारी प्रबंधन, बीते एक हफ्ते से छिपा रहा है। प्रबंधन वन्य प्राणियों की मौत के बाद भी पर्यटकों को सफारी घुमा रहा है और कमाई करने में लगा है। यहां तक कि अधिकारी वन्य प्राणियों की मौत की जानकारी पर्यटकों से भी छिपा रहे हैं। जाहिर है ऐसे में इंफेक्टेड बाड़ों में घूम रहे पर्यटकों के संक्रमण की चपेट में आने का डर है। इसके बाद भी सफारी प्रबंधन के अधिकारी पर्यटको का सफारी भ्रमण बंद नहीं कर रहे है।

अन्य जानवरों को भी  संक्रमण का खतरा:

जंगल सफारी  में गाड़ियों में घूम रहे पर्यटकों  से शेर, चीते और भालू जैसे वन्य प्राणियों में भी संक्रमण फैलने का खतरा है। जंगल सफारी प्रबंधन केमिकल घोल से संक्रमण को खत्म करने की बात कह रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारियों का ये दावा कागजी साबित हो रहा है।

नहीं बता पाए बीमारी:

वन्य प्राणियों की मौत का मामला सुर्खियों में आने के बाद गुरुवार को जंगल सफारी के अधिकारियों के अलावा वन विभाग के दर्जनों अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे। ये सभी अधिकारी सफारी परिसर के अंदर बने अस्पताल में दोपहर 12 बजे से लेकर शाम पांच बजे तक वन्य प्राणियों की जांच करते रहे। संक्रमण कैसे फैला इसका पता लगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन देर शाम तक इसकी जानकारी उन्हें नहीं हो पाई। विभागीय सूत्रों के अनुसार वन्य प्राणी खाना नहीं खा रहे हैं। उन्हें ज्यादा लूज मोशन की शिकायत है। सभी वन्य प्राणियों को कर्मचारियों की मॉनिटरिंग में रखा गया है। CCTV कैमरों से भी अफसर निगरानी कर रहे हैं।

जानकारी है कि जंगल सफारी में वन्यप्राणी चिकित्सक नहीं होने के कारण पशु चिकित्सा महाविद्यालय अंजोरा दुर्ग से वन्यप्राणी चिकित्सकों का दल बुलाया गया है। पर वन्यप्राणियों की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है?

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