इंदौर जिला अस्पताल की मर्चुरी में तीन दिन तक जमीन पर रखे-रखे सड़ गया शव, जिस गाड़ी में ले गए उसमें फैला खून

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इंदौर। हमारे शहर में मरीजों को शासकीय अस्पतालों में बेहतर इलाज की सुविधा तो नहीं मिलती है, लेकिन यहां शव रखने तक के इंतजाम नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला अस्पताल की मर्चुरी में पिछले दस वर्षों से शवों को सुरक्षित रखने के लिए लगा फ्रीजर खराब पड़ा है। करोड़ों रुपये का सालाना बजट पाने वाला स्वास्थ्य विभाग अब तक इसे ठीक नहीं करवा सका है। इसके कारण यहां शव डिकंपोज हो रहे हैं।

करीब तीन दिन पहले छत्रीपुरा थाना क्षेत्र में 32 वर्षीय अज्ञात युवक का शव मिला, जिसे जिला अस्पताल लाया गया था। पुलिस ने पहचान की कोशिश की, लेकिन स्वजन का पता नहीं चल सका। ऐसे में शव को मर्चुरी में रखा गया। शव को जमीन पर रखा गया, जिस कारण शव डिकंपोज हो गया।
तीन दिन बीतने के बाद जब एक सामाजिक संस्था अंतिम संस्कार के लिए शव लेने पहुंची, तो वहां का दृश्य बेहद दर्दनाक था। शव पूरी तरह सड़-गल चुका था। तेज दुर्गंध के कारण वहां खड़ा होना तक मुश्किल था। शरीर से रक्तस्राव हो रहा था और हालात इतने खराब थे कि जिस वाहन में शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया, वह भी खून से भर गया।
कई बार शिकायत, लेकिन जिम्मेदारों को नहीं पड़ रहा फर्क
गौरतलब है कि जिला अस्पताल की मर्चुरी के उपकरण लंबे समय से खराब हैं और कई बार शिकायतें भी की जा चुकी हैं। इसके बावजूद फ्रीजर को ठीक करवाने और नए फ्रीजर की व्यवस्था नहीं हो पाई। जिम्मेदारों तक शिकायतें पहुंचती भी हैं तो वे इसे नजरअंदाज कर देते हैं। अस्पताल में सीएमएचओ भी बार-बार निरीक्षण के लिए जाते हैं, लेकिन वे व्यवस्थाओं में सुधार नहीं करवा पाते हैं।
लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को नींद से जागने की आवश्यकता है। सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती है, दूसरी ओर शवों को सुरक्षित रखने जैसी न्यूनतम व्यवस्था भी सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। यानी कागजों में योजनाएं भले आगे बढ़ रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।
फ्रीजर दान करने को तैयार दानदाता
इंदौर जिला अस्पताल में शव रखने के लिए फ्रीजर उपलब्ध करवाने के लिए दानदाता भी आगे आ रहे है लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन रुचि नहीं ले रहा है। क्योंकि अस्पताल के पास इसकी देखरेख के लिए स्टाफ नहीं है। जानकारी के अनुसार 10 वर्ष पहले जिला अस्पताल में 16 शव तक रखने की व्यवस्था थी, लेकिन अब एक भी शव यहां नहीं रख पा रहे हैं।



