सावधान! साइबर ठगों के निशाने पर मजदूर-बेरोजगार, सरकारी योजना और नौकरी का झांसा देकर खुलवा रहे ‘म्यूल खाते’

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भोपाल। देश-विदेश में बैठे साइबर ठग म्यूल खातों (जिनमें साइबर ठगी की राशि पहुंचती है) के लिए मजदूरों, बेरोजगारों और कम पढ़े लिखे लोगों को निशाना बना रहे हैं। मध्य प्रदेश का ही उदाहरण लें तो यहां राज्य साइबर सेल द्वारा चलाए गए विशेष अभियान ऑपरेशन मैट्रिक्स में सामने आया है कि म्यूल खातों को लेकर 12 जिलों में दर्ज 26 FIR में सर्वाधिक आरोपित मजदूर हैं। इनमें शामिल सतना जिले में स्थित सीमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रलोभन देकर म्यूल खाता खुलवाए।

बेरोजगारों को भी नौकरी का झांसा देकर उनसे म्यूल खाते खुलवाए गए। बता दें कि मध्य प्रदेश में लगभग तीन लाख म्यूल खाते मिले हैं। पहले चरण में तीन हजार खातों की पड़ताल की गई है। इसमें उन खातों को लिया गया है, जिनमें सबसे पहले राशि पहुंची। इन्हें प्रथम लेयर के खाते कहा जाता है। इनकी संख्या आठ हजार से अधिक है। दरअसल, म्यूल खाता के विरुद्ध दो माह तक चलाए गए ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ में एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भी पता चला है, जिसके तार एक अफ्रीकी देश से जुड़े हैं।
ग्वालियर में मिले एक म्यूल खाते की पड़ताल में इस गिरोह का पता चला है। इसी तरह से तीन ऐसे गिरोह मिले हैं जिनका नेटवर्क मप्र सहित कई राज्यों में फैला है। पड़ताल में यह भी सामने आया है कि म्यूल खातों की खरीद-बिक्री चार से पांच चरणों में संगठित गिरोह के माध्यम से हो रही है। पहले चरण में खाताधारक को खाता खुलवाने या खाता किराये पर लेने पर चार से पांच हजार रुपये दिए जाते हैं।
इसके बाद दूसरा गिरोह सक्रिय होता है जो 10 से 15 हजार रुपये लेकर खातों की जानकारी तीसरे चरण वाले को देता है। गिरोह का तीसरा अपराधी सीधा साइबर ठगी करने वाले से जुड़ा होता है। वह बड़ा सौदा करता है। यह भी पता चला है कि कुछ खाताधारक खुद टेलीग्राम एप में किराये पर खाता उपलब्ध कराने का आफर देते हैं।
ठगी की राशि निकाल न लें खाताधारक, इसलिए होटल में रखकर की जाती है निगरानी गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में सामने आया है कि अधिकतर खाताधारकों को बता दिया जाता है कि उनके खाते में बड़ी रकम आने वाली है, जिसमें उनका कमीशन मिलने वाला है। खाताधारक यह पैसा निकाल न ले, इसलिए गिरोह के लोग उन्हें होटलों में रखकर निगरानी करते हैं। ऐसे मामले पकड़े भी जा चुके हैं।
उन बैंक खातों का अधिक उपयोग जिनमें ट्रांजेक्शन की सीमा ज्यादा एक पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ठग राशि रखने के लिए ऐसे खातों का उपयोग करते हैं, जिनमें राशि ट्रांसफर करने की सीमा अपेक्षाकृत अधिक होती है। इनमें अधिकतर छोटे बैंक होते हैं। कारण राष्ट्रीयकृत बैंकों में बहुत सी सीमाएं लगाई गई हैं। दूसरा इन बैंकों से जल्दी यह पता चल जाता है कि राशि कब कहां ट्रांसफर की गई है।



