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उज्जैन। उज्जैन–इंदौर मार्ग (एसएच-59) पर सिक्सलेन निर्माण को विकास की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन इसी परियोजना ने शनिवार को एक मजदूर की जान ले ली। होटल शांति पैलेस तिराहा स्थित फ्लाईओवर निर्माण स्थल पर स्ट्रक्चर कार्य के दौरान सरियों का जाल मजदूर पर गिर गया, जिसमें दबकर उसकी मौत हो गई।
यह हादसा किसी तकनीकी चूक से अधिक, निर्माण स्थल पर बरती जा रही घोर लापरवाही का परिणाम रहा। मजदूर बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहा था। लगातार चेतावनियों, मीडिया रिपोर्ट और नियमों के बावजूद सेफ्टी मानकों की अनदेखी जारी रही।
सरिया बांधने के दौरान संतुलन बिगड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फ्लाईओवर के पिलर स्ट्रक्चर का काम ऊंचाई पर चल रहा था। सरिया बांधने के दौरान संतुलन बिगड़ा और भारी सरिया स्ट्रक्चर सीधे मजदूर अशोक पुत्र प्रेमचंद्र गजू उम्र 22 वर्ष निवासी ग्राम कटांग लातेहार झारखंड के ऊपर आ गिरा। वह सरियों के जाल में बुरी तरह फंस गया।
मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन स्ट्रक्चर भारी होने के कारण तत्काल राहत नहीं मिल सकी। सूचना मिलने पर जिम्मेदार गुजरात के पेटी कान्ट्रैक्टर ‘पीएस इंफ्राकान’ के प्रतिनिधि, पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शव को बाहर निकाला जा सका। हादसे ने सिक्सलेन परियोजना में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं
निर्माण स्थल पर न सेफ्टी नेट लगे थे, न लाइफ लाइन और न ही ऊंचाई पर कार्य के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग दिखाई दी। सुपरविजन की कमी भी साफ नजर आई। सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है, तो मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही। यह पहला मौका नहीं है जब सिक्सलेन परियोजना में सेफ्टी को लेकर सवाल उठे हों।
इससे पहले भी ‘नईदुनिया’ ने विभिन्न निर्माण स्थलों पर मजदूरों से बिना सेफ्टी किट काम कराए जाने के मामलों को उजागर किया था, लेकिन न तो ठेकेदार एजेंसी ने सबक लिया और न ही जिम्मेदार विभागों ने सख्ती दिखाई। नतीजा एक और मजदूर की मौत के रूप में सामने आया। क्या है सिक्सलेन परियोजना की प्रोग्रेस उज्जैन–इंदौर मार्ग को फोरलेन से सिक्सलेन में परिवर्तित करने की यह परियोजना मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की है।
2025 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य
इसकी स्वीकृत लंबाई 46.475 किलोमीटर है। इसे जनवरी- 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। लागत 1692 करोड़ रुपये है, जिसमें से लगभग 735 करोड़ रुपये सिविल कार्यों पर खर्च किए जा रहे हैं। निर्माण कार्य जनवरी 2025 में शुरू हुआ था।
अब तक परियोजना का करीब 46 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। अनुबंध के अनुसार परियोजना को वर्ष 2027 की शुरुआत तक पूरा किया जाना है। मार्ग पर दो बड़े पुल, आठ फ्लाईओवर, छह अंडरपास और 70 से अधिक कलवर्ट बाक्स बनाए जा रहे हैं। शांति पैलेस तिराहा फ्लाईओवर इसी योजना का अहम हिस्सा है।