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अवैध रेत खनन मामले में तहसीलदार नीलम पिस्दा को कुछ कथित यूट्यूबर पत्रकार द्वारा दबाव बनाने का आरोप

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) l छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अवैध रेत खनन के एक मामले को लेकर पचपेड़ी तहसीलदार नीलम पिस्दा पर कुछ कथित पत्रकारों द्वारा अनावश्यक दबाव बनाने और उन्हें बदनाम करने की कोशिश किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायत के अनुसार कुछ लोगों द्वारा यह खबरें प्रसारित की जा रही हैं कि तहसीलदार नीलम पिस्दा के संरक्षण में शिवनाथ नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन का कार्य चल रहा है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार पचपेड़ी तहसीलदार नीलम पिस्दा एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने पूरे मामले को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि जब-जब खुद को पत्रकार बताने वाले लोगों द्वारा उन्हें फोन पर अवैध खनन की सूचना दी गई, उन्होंने हर बार तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित स्थानों पर जांच टीम भेजी। लेकिन बार-बार जांच कराने के बावजूद कहीं भी अवैध खनन होता हुआ नहीं पाया गया।

मामले में पूछताछ करने पर तहसीलदार नीलम पिस्दा ने बताया कि दो व्यक्ति, जिनके नाम रूपचंद राय और मिथलेश साहू हैं और जो स्वयं को पत्रकार बताते हैं, लगातार मोबाइल के माध्यम से शिकायतें करते रहे। उनके द्वारा दी गई सूचनाओं के आधार पर कई बार जांच कराई गई, लेकिन मौके पर अवैध खनन से संबंधित कोई गतिविधि नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों द्वारा उन पर नाजायज और अनुचित दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि प्रशासन अवैध खनन को लेकर पूरी तरह गंभीर और सतर्क है। भविष्य में यदि कहीं भी अवैध रेत खनन का मामला सामने आता है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि किसी भी अवैध गतिविधि को संरक्षण देने का प्रश्न ही नहीं उठता।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया है कि क्षेत्र में अवैध खनन का कार्य भलौनी गांव के सरपंच के संरक्षण में किया जाता है। इसके बावजूद तहसीलदार नीलम पिस्दा को ही निशाना बनाकर उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि उनकी ईमानदार कार्यशैली के कारण ही कुछ स्वार्थी तत्व उनके खिलाफ माहौल तैयार कर रहे हैं।

मामले को लेकर तहसीलदार नीलम पिस्दा ने कहा है कि उनके ऊपर अवैध रूप से दबाव बनाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इस तरह के निराधार आरोपों के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने और अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उच्च अधिकारियों द्वारा पूरे प्रकरण पर नजर रखी जा रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

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